Monday, 18 June 2018

छन्द [ वर्णिक छंद और मात्रिक छंद में अंतर ] भाग – 3



वर्णिक छंद – जिन छन्दों की रचना वर्णों की गणना के आधार पर की जाती है उन्हें वर्णिक छंद कहते हैं | इसमें गणों को देखा जाता है | ‘गण’ का अर्थ होता है – ‘समूह’ | वर्णिक छंदों में तीन वर्णों के समूह को गण कहते हैं और मात्रिक छंदों में चार मात्राओं के समूह को गण कहते हैं | गण आठ प्रकार के होते हैं |


इसके लिए एक सूत्र दिया गया है – ‘य मा ता रा ज भा न स ल गा
प्रमुख वर्णिक छंद इस प्रकार हैं –

1. इंद्रवज्रा छंद – इसके प्रत्येक चरण में ग्यारह वर्ण हैं , पाँचवें या छठे वर्ण पर यति होती है | इसमें दो तगण , एक जगण तथा अंत में दो गुरु होते हैं | जैसे -

ऽ ऽ | ऽ ऽ | | ऽ | ऽ ऽ
जो मैं नया ग्रन्थ विलोकता हूँ ,
ऽ ऽ | ऽ ऽ | | ऽ | ऽ ऽ
भाता मुझे सो नव मित्र सा है |

देखूँ उसे मैं नित सार वाला ,
मानो मिला मित्र मुझे पुराना |


2. उपेन्द्रवज्रा छंद – इसके भी प्रत्येक चरण में ग्यारह वर्ण हैं , पाँचवें या छठे वर्ण पर यति होती है | इसमें जगण , तगण , जगण तथा अंत में दो गुरु होते हैं | जैसे - 

| ऽ | ऽ ऽ | | ऽ | ऽ ऽ
बड़ा कि छोटा कुछ काम कीजै |
| ऽ | ऽ ऽ || ऽ | ऽ ऽ
परन्तु पूर्वापर सोच लीजै ||

3. वसन्ततिलका छंद – इस छंद के प्रत्येक चरण में चौदह वर्ण होते हैं | वर्णों के क्रम में तगण , भगण , दो जगण तथा दो गुरु रहते हैं | जैसे - 
ऽ ऽ | ऽ | | | ऽ | | ऽ | ऽ ऽ
बातें बड़ी सरस थे कहते बिहारी ,
ऽ ऽ   |  |  |  |  |     ऽ  |  |   ऽ |  ऽ ऽ
छोटे बड़े सकल का हित चाहते थे |

4. मालिनी छन्द – इसके प्रत्येक चरण में 15 वर्ण होते हैं, जो क्रमश: नगण ,नगण , मगण ,यगण , यगण के रूप में लिखे जाते हैं | यति आठ व सात वर्णों पर होती है | जैसे - 
 |  |  |  |    | |  ऽ ऽ ऽ |   ऽ  ऽ   |  ऽ  ऽ
प्रिययति वह मेरा प्राण प्यारा कहाँ है ?
 |  |   |  |  |   |   ऽ ऽ   ऽ   | ऽ ऽ   |  ऽ ऽ
दुख जलनिधि डूबी का सहारा कहाँ है ?
लख मुख जिसका मैं आज लौं जी सकी हूँ ,
वह ह्रदय हमारा नैन तारा कहाँ है ?


5. मन्दाक्रान्ता छंद – इस छन्द के प्रत्येक चरण में 17 वर्ण होते हैं , जो क्रमश: मगण , भगण , नगण , तगण व गुरु , गुरु के रूप में लिखे जाते हैं | जैसे – 
ऽ  ऽ  ऽ  ऽ   |  |  |  |  | ऽ   ऽ |  ऽ   ऽ |   ऽ  ऽ
फूली डालें सुकुसुममयी तीय की देख आँखें |
आ जाती है मुरलिधर की मोहिनी मूर्ति आगे |

6. वंशस्थ छन्द - इस छन्द के प्रत्येक चरण में 12 वर्ण होते हैं , जो क्रमश: जगण , तगण , जगण , रगण के रूप में लिखे जाते हैं | इसमें यति प्रत्येक चरण के अंत में होती है |  जैसे - 
 |  ऽ   |  ऽ  ऽ  |   | ऽ |  ऽ | ऽ
दिनान्त था वे दिननाथ डूबते ,
सधेनु आते गृह ग्वाल बाल थे |
दिगन्त में गो – रज थी समुत्थिता ,
विषाण नाना बजते सवेणु थे |

7. द्रुतविलम्बित छन्द – इस छंद के प्रत्येक चरण में 12 वर्ण होते हैं , जो क्रमश: नगण , भगण , भगण ,रगण के रूप में लिखे जाते हैं | इसमें यति प्रत्येक चरण के अंत में होती है | जैसे - 
 |  |  |   ऽ   |  |  ऽ  |   |  ऽ |  ऽ
दिवस का अवसान समीप था ,
|  |  |  ऽ   |   |    ऽ |   |   ऽ  |  ऽ
गगन था कुछ लोहित हो चला |
तरु शिखा पर थी अब राजती ,
कमलिनी कुल बल्लभ की प्रभा |

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1 comment:

  1. जी बहुत ही अच्छी पाठ्यसामग्री

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