Thursday 23 May 2024

 



आदिकाल की परिस्थितियाँ


आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी – नामकरण – आदिकाल
समय – 1000 – 1400 ई.

अधिकतर विद्वानों के अनुसार काल सीमा – सातवीं शती के मध्य से चौदहवीं शती के मध्य तक

साहित्य समाज का दर्पण होता है | साहित्यकार जिस समाज में रहता है उस समाज की परम्पराएँ, घटनाएँ, स्थितियाँ, परिवेश तथा परिवर्तन उसकी मानसिकता पर प्रभाव डालते हैं और इसी से उसका सृजन भी प्रभावित होता है |

1. राजनैतिक परिस्थितियाँ

  • हर्षवर्धन की मृत्यु 647 ई. में
  • वर्धन साम्राज्य के अंत के बाद भारत का खंड – खंड हो जाना |
  • राजपूतों और जाटों का संघर्ष
  • अरब में इस्लाम का उदय, भारत के उत्तर – पश्चिमी भाग पर उसका प्रभाव |
  • मोहम्मद बिन कासिम का सिंध पर आक्रमण और सत्ता स्थापित करना |
  • 11वीं – 12वीं सदी में दिल्ली में तोमर , अजमेर में चौहान तथा कन्नौज में गहडवालों का शक्तिशाली राज्य परंतु एकता का अभाव
  • मोहम्मद गौरी द्वारा पृथ्वीराज चौहान तथा जयचंद को हराकर मुस्लिम सत्ता की स्थापना |

निष्कर्ष – आदिकालीन राजनैतिक परिस्थितियाँ गृह – कलह से युक्त थी |

2. सामजिक परिस्थितियाँ

  • समाज विभिन्न जातियों व वर्गों में बंट गया |
  • शूद्रों को समाज में निचला स्थान तथा बाह्मणों को उच्च स्थान प्राप्त
  • रीति – रिवाज़ों की कट्टरता | सती प्रथा, बाल विवाह तथा जौहर प्रथा का प्रचलन
  • बोद्धों तथा जैनियों द्वारा समाज सुधार का कार्य किया जाना
  • मुसलमानों के आगमन से राष्ट्रीय एकता खंडित
  • अमीर लोगों और राजाओं में बहुपत्नी प्रथा |

3. धार्मिक परिस्थितियाँ

  • बौद्ध धर्म व जैन धर्म के प्रति लोगों का झुकाव परंतु हिंदु धर्म की प्रमुखता
  • 12वीं शती में शैव मत व वैष्णव मत का जोर
  •  बौद्ध धर्म हीनयान, महायान, वज्रयान व सहजयान आदि शाखाओं में विभाजित
  • रामानुज निम्बार्क आदि आचार्यों द्वारा ज्ञान और भक्तिप्रधान आध्यात्मिकता का प्रसार
  • आदिकाल की धार्मिक परिस्थितियाँ अत्यंत विषम और असंतुलित
  • जनमानस पर गहरा असंतोष, क्षोभ तथा भ्रम छाया होना
  • कवियों द्वारा मानसिक स्थिति के अनुरूप खंडन – मंडन, हटयोग, वीरता एवं शृंगार का साहित्य लिखा जाना |

4. सांस्कृतिक परिस्थितियाँ

  • अपनी उन्नत व विकसित कलाओं के कारण भारत का सभ्य व सुसंस्कृत देशों में गिना जाना |
  • लोगों का जीवन धर्मभावना से ओतप्रोत, पवित्र एवं सुसंस्कृत | प्रमाण स्वरूप भुवनेश्वर, खजुराहो, पुरी, सोमनाथ, बेलोर, काँची, तंजोर आदि के मंदिर उपलब्ध |
  • मुगलों के बढ़ते प्रभाव की छाप तत्कालीन जन – जीवन तथा विभिन्न कलाओं पर स्पष्ट परिलक्षित
  • मूर्तिकला का हास
  • भारत में अनेक देवी – देवताओं की पूजा प्रचलित थी, जिनमें शिव और शक्ति का महत्त्व बढ़ा |
  • संगीत के क्षेत्र में नए प्रयासों का प्रतीक ‘संगीतरत्नाकर’ नामक ग्रंथ

5. साहित्यिक परिस्थितियाँ

  • साहित्य की तीन धाराएँ प्रचलित – संस्कृत साहित्य, प्राकृत एवं अपभ्रंश साहित्य एवं हिंदी साहित्य
  • आनंदवर्धन, अभिनवगुप्त, कुंतक, क्षेमेन्द्र, भोजदेव, मम्मट, राजशेखर, विश्वनाथ, भवभूति, श्रीहर्ष तथा जयदेव इसी युग की देन
  • शृंगार रस की कुशल अभिव्यक्ति, आश्रयदाताओं की प्रशंसा, और शौर्य गानों का प्रचलन

6. आर्थिक परिस्थितियाँ

  • युद्धों की विभीषिकाओं से आर्थिक स्थिति को भयंकर क्षति
  • जनता निर्धनता और लूट – मार से आक्रांत व त्रस्त
  • अंधविश्वास, रीतिरिवाज़ और तरह – तरह कर्मकांड मनुष्य को खोखला बना रहे थे |
  • जमींदार, सेनानायक, शासक, भूस्वामी तथा राज्याधिकारियों का आधिपत्य
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