Saturday 11 May 2024

 


भक्तिकाल की परिस्थितियाँ 

 नामकरण – मध्यकाल / भक्तिकाल  

आचार्य रामचंद्र शुक्ल - समय – 1318 ई. – 1543 ई. तक 

अधिकतर विद्वानों के अनुसार काल सीमा – चौदहवीं शती के मध्य से सत्रहवीं शती के मध्य तक 

तत्कालीन भारतीय जनता जिसमें हिंदू – मुस्लिम दोनों शामिल थे, राजनैतिक उत्पीड़न, धार्मिक भेदभाव, सामाजिक ऊँच – नीच एवं रूढ़िवादिता से परेशान थी | 12वीं – 13वीं शताब्दी में भारतीय राजनीति में जो परिवर्तन आया उससे यहाँ आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आया |

बदली हुई परिस्थितियों ने इन वर्गों को भक्ति आंदोलन की ओर आकृष्ट किया, क्योंकि भक्ति के क्षेत्र में किसी प्रकार के भेदभाव का स्थान नहीं था | इस आंदोलन का मूल आधार था – ‘जाति – पांति पूछे नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि को होई’ |

भक्तिकाल की प्रमुख परिस्थितियाँ या परिवेश इस प्रकार हैं - 

1. राजनैतिक परिवेश / ऐतिहासिक परिवेश

  • मध्यकाल भारत में मुस्लिम साम्राज्य का उत्थान – पतन का युग 
  • दिल्ली के सुलतान मुहम्मद – बिन – तुगलक की राज्य विस्तार की कामना 
  • 1375 – 1700 विक्रम संवत तक दास, खिलज़ी, तुगलक, सैयद, लोदी, मुग़ल आदि वंशों के व्यक्ति गद्दी पर रहे |
  • अंततः सभी छोटे – छोटे राज्यों पर अकबर का आधिपत्य 
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भक्तिकाल का परिचय देते हुए कहा है – देश में मुसलमानों का राज्य प्रतिष्ठित हो जाने पर हिंदू जनता के ह्रदय में गौरव, गर्व और उत्साह के लिए वह अवकाश न रह गया |
  • कवियों की वाणी में राजनैतिक व्यवस्था के प्रति असंतोष दिखाई देता है |

जैसे – 


“वेद धर्म दूरि गये, भूमि चोर भूप भये |
साधु सीद्यमान जान रीति पाप पीन की |”


2. सामाजिक परिवेश

  • सामाजिक परिस्थितियों में क्रांतिकारी परिवर्तन 
  • हिंदू – मुस्लिम संस्कृति में आदान – प्रदान 
  • हिंदुओं और मुसलमानों में समन्वय स्थापित 
  • जनता को निर्धनता, अभावों एवं आजीविका का संघर्ष करना पड़ता था |
  • प्रजा के रहन – सहन का स्तर निम्न कोटि का 
  • तुलसीदास के शब्दों में तत्कालीन समाज की स्थिति स्पष्ट झलकती है -


    खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि |
    बनिक को बनिज न चाकर को चाकरी ||
    जीविका- विहीन लोग सीद्यमान सोच - बस |
    कहैं एक एकन सो ‘कहाँ जाई, का करी ?’ ||

  • समाज दो वर्गों सुविधा संपन्न और असुविधा ग्रस्त में विभक्त 
  • हिंदू कन्याओं के साथ – साथ मुस्लिम महिलाओं की स्थिति भी ख़राब 
  • समाज में बहु विवाह प्रथा प्रचलित थी |

3. सांस्कृतिक परिवेश

  • हिंदू – मुस्लिम संस्कृतियों का निकट आना
  • संगीत, चित्र तथा भवन – निर्माण कलाओं में दोनों संस्कृतियों का सामंजस्य स्थापित होना
  • मूर्ति – पूजा, तीर्थ यात्रा, धर्म – शास्त्रों का सम्मान, कर्म फल में विश्वास, अवतारवाद तथा सगुण भक्ति का ही सर्वत्र आधिपत्य दिखाई देना |
  • मध्यकालीन हिंदू समाज के दो पक्ष –
         1. वह जो शास्त्रों का समर्थक है
         2. वह जो परम्परागत विश्वासों व मान्यताओं अथवा स्वानुभूति का पक्षधर है,

पौराणिक पक्ष
  • ईश्वर और मनुष्य के बीच संबंध स्थापित करने का एक माध्यम धर्म है
  • मध्यकाल में अरुचि और संस्कार का प्राधान्य था
  • ताजमहल और लालकिला भारतीय तथा ईरानी वास्तुकलाओं का उत्तम निदर्शन
  • नायक – नायिकाओं के नयनाभिराम चित्रों तथा विविध कलाओं के रूप में दोनों जातियों की चित्र कलाओं का समागम दर्शनीय


4 साहित्यिक परिवेश

  • शाही दरबारों में अरबी – फ़ारसी का प्रयोग
  • हिंदी की लोकभाषाओं का, विशेष रूप से अवधी तथा ब्रजभाषा का काव्य में प्रयोग होता था
  • कबीर, सूर तथा तुलसी की रचनाएँ साहित्यिक परिवेश की अनुपम देन है
  • भक्तिकालीन साहित्य, साहित्य का चरमोत्कर्ष था |
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